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कैंसर क्या है? यह कैसे होता है? कारण, लक्षण और बचने के उपाय : जानिए पूरी जानकारी


cancer kya hai aur isse bachne ke upay
Cancer
दोस्तों आज हम आपलोगों को अपने इस आर्टिक्ल में कैंसर की सम्पूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। इस आर्टिक्ल में आप यह जान पाएंगे की कैंसर क्या होता है? इसके होने के कारण क्या-क्या हैं, होने पर कैसा अनुभव होता है और इससे बचने के क्या-क्या उपाय है।

आजकल के प्रदूषण से भरे वातावरण ने बहुत सी नई-नई बीमारियों को जन्म दिया है। आज से लगभग 100 सालों पहले इस बीमारी का नाम भी कोई नहीं जानता था। पहले तो यह कैंसर आया उसके बाद इसने अपने कई सारे भाग बना लिए जैसे लिवर कैंसर, हार्ट कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, ब्लड कैंसर, ओरल कैंसर और स्किन कैंसर। इसे अच्छी तरह से जानने के लिए आप इस लेख को पूरा पढे क्योंकि आधे में आपको समझ में ही नहीं आएगा। हम सबसे पहले यह जान लेते हैं कि आखिर यह बीमारी है क्या।

कैंसर बीमारी क्या है
आप सभी इस बात को जानते ही होंगे की हमारे शरीर में बहुत सारी कोशिकाएँ मौजूद हैं, इतनी की हम गिन भी नहीं सकते हैं। कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमे हमारे शरीर की कोशिकाएँ अनियंत्रित होकर बढ्ने लगती हैं। कोशिकाओ के अनियंत्रित होने के कारण कई हैं। लेकिन यह हमारे शरीर के भीतर पाई जाने वाली एक ऐसी कोशिका है जो नेओप्लाज्म बनाती हैं। नेओप्लाज्म कोशिकाओं का वह समूह है जो अनियंत्रित तरीके से बढ़ता है और बढ़कर गांठ के रूप में बदल जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज नहीं ढूंढा जा सका है, हाँ सही समय पर इसका पता लगने पर बढ़ती कोशिकाओं को रोका जा सकता है और इससे बचा जा सकता है। हालांकि इसका पूरा दोष प्रदूषण को भी नहीं दिया जा सकता है। मानव प्रजाति के शरीर में हर बार कुछ नया परिवर्तन होता रहता है। इस परिवर्तन की प्रक्रिया के कारण ही हम वनमानुष से यहाँ तक पहुँच पाए हैं और इसी परिवर्तन के कारण हमारे शरीर की कोशिकाओं में कैंसर की कोशिकाएँ जन्म ले रही हैं। हमारे शरीर की कोशिकाओं में बदलाव और विभाजन होता रहता है और समय रहते हमारे शरीर की कैंसर की कोशिकाओं का बदलाव और उनके विभाजन (आपस में बट कर फैलना) को रोका जा सकता है।

इस बीमारी के कारण क्या-क्या हैं
चलिए हम बिलकुल शुरुआत से आरंभ करते हैं। प्रजनन क्रिया के दौरान जब मादा का अंडाणु किसी नर के शुक्राणु के संपर्क में आता है तो इससे एक कोशिका का निर्माण होता है। इसी कोशिका के आधार पर आने वाली प्रजाति या फिर बच्चे का विकास निर्भर करता है। इस कोशिका का आकार एक छोटे से गेंद के समान होता है। इसी कोशिका के विभाजन या बटवारे से पूरा शरीर विकसित होता है। संपर्क में आने के बाद से ही इन कोशिकाओं का विभाजन शुरू हो जाता है और यह अंत तक चलता रहता है।
जब हम युवा अवस्था में पहुँचते हैं तब तक यह हजारों की संख्या में बंट जाते हैं। यह बंटवार एक नियमित ढर्रे पर चलता है और नियंत्रण में होने के कारण इंसान के शरीर की मांसपेशियाँ, हड्डियाँ, आँखों की रोशनी, सिर से लेकर नाखून तक एक सुरक्षित तरीके से विकसित होती हैं। लेकिन जब हमारी कोशिकाओं का विभाजन या बंटवारा अनियंत्रित हो जाता है या जब यह अपने निश्चित ढर्रे से अलग होकर जरूरत से अधिक तेज गति से या कम गति से विकसित होने लगती हैं तब इस कैंसर की कोशिका का जन्म होता है। यह धीरे-धीरे दूसरी कोशिकाओं में फैलने लगता है और आपस में मिलकर गांठ का निर्माण करने लगता है। जब यह गांठ पूरी तरह से हमारे शरीर की कोशिकाओं में फैल जाता है तो व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। आप यह जान लें कि हमारे शरीर की कोशिकाओं में विभाजन सही तरीके से हो रहा है या नहीं इसका पूरा कंट्रोल हमारे जीन पर निर्भर करता है। यही इसके सटीक विकास और विभाजन को नियंत्रित करता है। जब जीन कमजोर हो जाता है तो कोशिकाओं से इसका नियंत्रण अनियमित तरीके से आरंभ हो जाता है।  

इसके लक्षण क्या-क्या हैं
जब बीमारी आरंभ होती है अर्थात जब कोशिकाएँ अपने निश्चित ढर्रे से अलग होकर विकसित होने लगती हैं तो शुरुआती दौर में इसका पता नहीं चलता है। लेकिन धीरे-धीरे लोग इसके बारे में महसूस करना आरंभ कर देते हैं। जब यह अपना असर दिखाना शुरू करता है तो यह सब लक्षण देखे जाते हैं।

मूत्रमार्ग से खून निकलना। पेशाब के समय दूषित जल के साथ खून आना।
मल त्याग करने के समय खून। इसका दर्द और रक्त की मात्रा बवासीर से काफी अलग होती है।
स्तन पर गांठ या ठल्ले होना।
मासिक धर्म के बाद भी रक्त आना।
किसी चीज को निगलने में बहुत दर्द होना।
स्किन पर कम समय में ही बदलाव आना।
यह बदलाव लाल चकत्ते, स्किन का काला पड़ना, अधिक बाल उग आना और खुलजी के रूप में आ सकते हैं।
मुँह में छाले के साथ-साथ सूजन और ठीक होने का नाम न लेना।
मुँह में जहाँ-तहाँ गाँठे बनना।
फेफड़े में बार-बार दर्द होना और सांस लेने में कठिनाई और घुटन महसूस होना।
खाँसते समय खून आना। यह टीवी सहित लंग्स कैंसर का भी लक्षण है।
हड्डियों में काफी दर्द होना और दर्द की वजह से बुखार आना।
स्किन पर दर्द भरे मस्से आना।
तेजी से वजन कम होना, लगभग एक हफ्ते में आधा हो जाना।
पेट का दर्द और दर्द की वजह से बुखार।
सिर में हमेशा दर्द और चक्कर, इसकी वजह से उल्टी आना।
दिमाग में गांठ हो जाने पर याददास्त कमजोर हो जाती है।


बचने के उपाय
सिर्फ एक ही उपाय है और इसे कुछ उपभाग हैं। मतलब की आपको अपने शरीर के जीन को मजबूत बनाए रखना है और इसे मजबूत बनाए रखने के लिए आपको यह सब करना है।

धूम्रपान न करें - सिगरेट में बेन्जीन, नाइट्रोसेमाइन्स और पोलोनियम पाए जाते हैं जो आपके शरीर में जाकर उस जगह हमला करते हैं जहाँ कैंसर को रोकने वाले जीन होते हैं। यह आपके जीन और डीएनए को कमजोर करके नष्ट कर देता है।
अल्कोहल का सेवन न करें - शराब के सेवन से हमारे शरीर की कोशिकाएँ धीरे-धीरे कमजोर होकर नष्ट होने लगती हैं। इस कारण उन कोशिकाओं का भरपाया करने के लिए दूसरी शारीरिक कोशिकाओं में बदलाव आता है। डीएनए में भी बदलाव आता है। रिसर्च के मुताबिक 24 घंटों में पुरुषों के लिए दो ड्रिंक और महिलाओं के एक ड्रिंक हानिकारक नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है की आप तीन दिनों तक एकदम न पिये और चौथे दिन पूरा हिसाब-किताब बराबर।
वजन को कंट्रोल में रखे - मोटापा आपके शरीर के जीन को कमजोर करता है। आपके शरीर के फैट कोलेस्ट्रोल को बढ़ावा देते हैं और यह जीन को कमजोर करता है। इसलिए आप अपने वजन को नियंत्रण में रखे और इसके लिए आप खुद को एक्सरसाइज और अलग-अलग एक्टिविटी में व्यस्त रखें।
एंटीबायोटिक दावा का अधिक इस्तेमाल न करें - यह हमारे शरीर में होने वाले इन्फेक्शन को दूर करता है। लेकिन इसका जरूरत से अधिक सेवन जीन को कमजोर कर देता है और शरीर को कैंसर ग्रस्त।
फल और हरी सब्जियाँ खाएं - दरअसल, फल और हरी सब्जियाँ हमारे लिए वरदान की तरह है और आप इस बात से वाकिफ हैं।
नींबू और संतरे का जूस पिए।
गाय के मूत्र का सेवन करते हैं तो यह कभी आपके आस-पास भी नहीं आएगा।
मांसाहारी न बने, जितना हो अधिक से अधिक साग-सब्जियाँ खाएं।
कैंसर का टीका - यह एकमात्र सीधा तरीका है। मतलब की अगर किसी को कैंसर हो जाता है तो उसके पास टीका के अलावे और कोई भी ऑप्शन नहीं रह जाता है। हालांकि जब व्यक्ति डॉक्टर के पास इलाज के लिए जाएगा तो वह भी उसे ऊपर की सारी चीजें करने की सलाह देंगे।

आज कैंसर की वजह से होने वाली कई बीमारियाँ हैं। कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक वर्तमान में कैंसर की लगभग 200 किस्में हैं। इस बीमारी की शुरुआत हमारे जन्म के पहले से ही आरंभ हो जाती है। जैसा की ऊपर बताया गया है कि यह बीमारी कोशिकाओं के अनियमित तरीके से विभाजन होने के कारण होती है। तो अगर कोशिका का विभाजन ठीक से नहीं होगा तो हमारा जीवन संभव नहीं और अगर ठीक से नहीं हुआ तो कैंसर। जरूरत है इसके ऊपर नियंत्रण रखने वाले जीन को मजबूत बनाए रखने की। इसका कारण यह है की जीन हमारे शरीर का वह हिस्सा है जो इसके ऊपर अपना पूरा कंट्रोल रखता है और अगर किसी कारण कोशिका अनियंत्रित हो जाती है तो यह उसे तुरंत ठीक करता है। तो दोस्तों कैंसर जैसी इस भयानक बीमारी को भी रोकने का तरीका व्यक्ति के पास आज मौजूद है, जरूरत है तो बस सावधानी बरतने की।

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